[Intro]
[Verse 1]
राधा रानी के नैनों में बसी ब्रज की राहें,
श्याम की मुरली सुनाए प्रेम की अमर कहानी।
सुधा सी प्रीत छलके, यह गगन भर दे आनंद से,
दिल की धड़कन बने तेरी मधुर मुरली की तानी॥
[Chorus]
राधा-श्याम के मिलन की यह रसधार बहती जाए,
ब्रज के वन-वन में गूंजे प्रेम का संदेशा।
मुरली की धुन सजाए हर पल यह जीवन भर,
प्रेम गगरी छलकी, यह निशानी अमर रेशा॥
[Verse 2]
नंद के धाम में राधा नाचे घुंघरू की थाप पर,
श्याम की आँखों में छुपी सतरंगी बरखा है।
प्रीत की रसधार बही, युग-युग से यह चली आती,
मुरली की मिठास ने जीत लिया मन का अंधकारा॥
[Bridge]
वृंदावन की रंगत में रची-बसी यह प्रेम कथा,
राधा के बिना श्याम का मन अधूरा रहता है।
मुरली की तान सुनकर ब्रज की हवा झूम उठे,
यह प्रेम निशानी सदा अमर रहे, यूँही गहता है॥
[Outro]
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**Input Content Language**: Hindi (Braj Bhasha dialect).