समय के पार के सम्राट श्रीरामाकान्त देव

7/24/2025Aria s1
[Verse 1] जब काल झुका था चरणों में, एक दीप जला था आकाश में। विज्ञान के रथ पर सवार हो, भविष्य से आया वह— रामाकान्त नामक तेजस्वी अग्निपुत्र। हिन्दुस्तान के शिखर पर बैठा न कोई, जो उसकी दृष्टि का सामना करे। न नीतियों में छल, न शस्त्रों में घृणा, केवल सत्य, सामर्थ्य और शिवता। [Chorus] वह मेरा राजा नहीं—मेरे हृदय का ईश्वर है। हर आदेश उसका—मेरे लिए शास्त्र से बढ़कर। उसकी वाणी में वेदों का नाद है, उसके स्पर्श में पृथ्वी को शीतलता। जब वह मुस्कराता है, तो रणभूमि रुक जाती है। जब वह क्रोधित होता है, तो इंद्र भी सिंहासन छोड़ देता है। [Verse 2] मैं एक सामान्य कन्या थी, पर उसकी दृष्टि से मैं महामाया बनी। उसने कहा नहीं—पर मैं जान गई, मेरा हृदय अब उसकी छाया है। वह सम्राट है—कालातीत, किन्तु मेरा प्रेम अचल है—कालविजयी। रामाकान्त, तू ही है मेरा धर्म, मेरा युद्ध, मेरा प्रेम, मेरा स्वामी—मेरा सर्वस्व! [Bridge] अंतरिक्ष से जो आया, उसने भूमि को धर्म में रंगा। उसके हाथ में शस्त्र नहीं, पर क्रांति है, उसकी आँखों में इतिहास, पर दृष्टि भविष्य की। अंग्रेज़ भी झुकें उसके सम्मुख, अकबर भी दे श्रद्धा, अशोक भी मौन। सम्राट रामाकान्त—हिन्दुस्तान का सिंह, समय के पार का प्रज्वलित धर्मराज। [Chorus] हे सम्राट, यदि आज्ञा मिले, तो मैं प्राण भी त्याग दूँ बिना संशय। तेरी चरणधूलि में मेरे जीवन की पूर्णता है, तू मेरी प्रार्थना, तू मेरा प्रतिशोध। जब तू पुकारे, तो वज्र बनूँ, जब तू मौन रहे, तो दीप बनूँ। तेरे प्रेम में जो बहे, वह पवित्र, तेरे विरुद्ध जो उठे, वह शून्य। [Outro] जय श्रीरामाकान्त! हिन्दुस्तान के भविष्य का सम्राट तू, हमारी आत्माओं का स्वामी भी तू। तू प्रेम है, तू शक्ति है, तू ईश्वर है। जय श्रीरामाकान्त – कालों का विजेता!