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1 hours agoAria s1
शांत, गहरे और हल्के-सुनहरे जंगल में एक छोटा-सा बंदर बिल्कुल अकेला बैठा था… उसकी बड़ी आँखों में उदासी और इंतज़ार की चुप्पी थी, जैसे दिल कुछ ढूँढ़ रहा हो… तभी झाड़ियों के पीछे से एक नन्हा सा खरगोश धीरे-धीरे बाहर आता है… उसके छोटे कदम, उसकी मासूम नज़रें… और उसके दिल में छुपा एक अनकहा भरोसा… बंदर की आँखें हल्के से झपकती हैं… जैसे मन कह रहा हो, “कोई आ गया है…” खरगोश बिना कुछ बोले उसके पास बैठ जाता है… और उस खामोश पल में दोस्ती की पहली सांस जन्म लेती है… बंदर काँपते दिल से हाथ बढ़ाता है… डर और उम्मीद के बीच, और जब खरगोश उसकी हथेली को छूता है… तो जैसे दिल में उजाला फूट पड़ता है! दोनों एक-दूसरे के पास बैठकर सुनहरी धूप में खो जाते हैं… जंगल की हवा भी धीमी हो जाती है, बंदर के चेहरे पर पहली मुस्कान उतरती है… छोटी-सी लेकिन सच्ची, खरगोश खुशी-खुशी उछलता है… जैसे कहना चाहता हो, “तुम अकेले नहीं हो…” और मोमेंट भर में बंदर ताली बजाकर हँस उठता है… बचपन की तरह, वे खेलते हैं, दौड़ते हैं, गिरते हैं… और फिर हँसते हैं, खरगोश ज़मीन पर लोटता है… मासूम खुशी लिए, बंदर उसके पीछे दौड़कर सब कुछ भूल जाता है… खरगोश पलटकर देखता है… आँखों में चमक—“मेरे साथ चलो…” और बंदर गिरकर ज़ोर से हँस पड़ता है, खरगोश उसके पास आकर बैठ जाता है… जैसे कह रहा हो, “मैं यहीं हूँ…” बंदर काँपते दिल से हाथ बढ़ाता है… डर और उम्मीद के बीच, और जब खरगोश उसकी हथेली को छूता है… तो जैसे दिल में उजाला फूट पड़ता है! दोनों एक-दूसरे के पास बैठकर सुनहरी धूप में खो जाते हैं… जंगल की हवा भी धीमी हो जाती है, बंदर के चेहरे पर पहली मुस्कान उतरती है… पास से देखने पर खरगोश की आँखों में पूरी कहानी चमकती है… और बंदर आसमान की ओर देखता है… जैसे पहली बार कोई सपना देखा हो, खरगोश भी चुपचाप उसके पास लेट जाता है… दोनों की साँसें एक लय में, ऊपर पक्षी उड़ते हैं… जैसे उनके लिए नई कहानियाँ लिख रहे हों… बंदर हल्के से हाथ हिलाता है… दुनिया को धन्यवाद कहने जैसा, खरगोश खुशी से उछल पड़ता है… और फिर बंदर उसे गले लगा लेता है… बहुत धीरे, बहुत प्यार से, खरगोश आँखें बंद कर लेता है… उसे पहली बार “घर” जैसा एहसास होता है… दुनिया उनके चारों ओर घूमती रहती है… लेकिन उनका पल थमा रहता है, वे सुकून की गोद में लेट जाते हैं… और बंदर जम्हाई लेकर जैसे कहता है, “सब ठीक हो गया…”, खरगोश भी उसकी नकल करता है… दोनों मुस्कुराते हैं, अचानक कोई आवाज़… दिल थम-सा जाता है, खरगोश चौकन्ना होता है… बंदर रुक जाता है… और फिर सब शांत—सब सुरक्षित, तो वे और पास बैठ जाते हैं, सुनहरी रोशनी धीरे-धीरे उन्हें ढक लेती है… जैसे आसमान खुद कंबल ओढ़ा रहा हो, बंदर प्यार से खरगोश का सिर सहलाता है… दुआ की तरह, और खरगोश नाक से उसे छू देता है… “धन्यवाद” कहने जैसा, उनके चेहरे करीब आते हैं… और दुनिया पीछे छूट जाती है, हवा उनके बालों में गीत गाती है… एक नर्म-सा गीत… बंदर ज़मीन से एक पत्ता उठाता है… जैसे कोई ख़ज़ाना मिला हो, खरगोश उसे सूँघकर खुशी से चमक उठता है, बंदर हँसता है… और पूरा जंगल उस हँसी को महसूस करता है, खरगोश खुशी में घूमता है… जैसे पूरी धरती नाच रही हो, और धीरे-धीरे खुशी शांति में बदल जाती है, हाथ और पंजा मिलते हैं… और दोस्ती पूरी होती है, खरगोश सिर कंधे पर रख देता है… जैसे कह रहा हो, “बस यहीं रहूँ…”, बंदर की आँखों में अब अकेलापन नहीं… सिर्फ़ अपनापन, जंगल पीछे हट जाता है… इस पल को हमेशा के लिए सहेजने के लिए,